संशोधित ई कॉमर्स FDI नीति के बाद समारा-ऐमज़ॉन द्वारा किए गए More के अधिग्रहण की CCI करेगा जांच

समारा- ऐमज़ॉन द्वारा मोर (More) स्टोर ( आदित्य बिड़ला समूह की खुदरा इकाई) के अधिग्रहण के बाद, इससे जुड़ी घटनाओं में एक नया मोड़ आया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ( CCI) ने समारा कैपिटल से इस सौदे में अमेरिका स्थित ई कॉमर्स मार्किटप्लेस ऐमज़ॉन की भूमिका पर सवाल उठाया है।

यह प्रश्न प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के संशोधित मानदंडों को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को इस बात का खतरा है कि यदि यह समझौता अपना अंतिम रूप ले लेता है तो ऐमज़ॉन इस नीति का उल्लंघन कर सकता है।

इस सौदे से जुड़े विवरण से पता चलता है कि ऐमज़ॉन की कंपनी में 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी वहीं समारा 51 प्रतिशत का हकदार होगा। ऐमज़ॉन की भूमिका पर उठाए गए सवाल इसी बात से संबंधित है कि ऐमज़ॉन, मोर की अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ क्या भूमिका निभाएगा।

ऐमज़ॉन की मोर की दैनिक गतिविधियों में भागीदारी होगी या नहीं, बोर्ड में उसका प्रतिनिधित्व कैसे किया जाएगा और मोर ऐमज़ॉन मार्किटप्लेस का एकीकृत हिस्सा बनेगा या नहीं, यह कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो CCI के लिए चिंता के विषय हैं।

इसका मुख्य कारण नई नीति के कुछ प्रावधान हैं। आधारभूत स्तर पर, मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 50 प्रतिशत FDI की अनुमति है और ई कॉमर्स मार्किटप्लेस वर्ग व कैश एंड कैरी खुदरा क्षेत्र में 100 प्रतिशत। चूंकि ऐमज़ॉन का स्वामित्व 49 प्रतिशत है, तो कहीं पर भी इन मानदंडों का उल्लंघन नहीं दिखता है।

परंतु फिर भी दो अनुच्छेद ऐसे हैं जिनके कारण CCI को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है।

नई नीति के एक अनुच्छेद के अनुसार, कोई भी ई कॉमर्स कार्यक्षेत्र एंटिटी, विस्तृत सूची के नियंत्रण में नहीं हो सकती क्योंकि ऐसा होने पर यह उस एंटिटी के व्यापार मॉडल को इन्वेंट्री आधारित बना देगा। यदि ऐमज़ॉन, मोर के दैनिक संचालन या गतिविधियों का हिस्सा बनता है तो यह इस अनुच्छेद का उल्लंघन होगा क्योंकि ऐसी स्थिति में ऐमज़ॉन की पकड़, मोर के स्टोर में रखी इन्वेंट्री पर होगी।

दूसरा, यदि किसी एंटिटी पर किसी ई कॉमर्स मार्किटप्लेस या उसकी समूह कंपनियों द्वारा आंशिक या सम्पूर्ण रुप से स्वामित्व है अथवा इनमें से किसी समूह कंपनियों का उसकी इन्वेंट्री पर नियंत्रण है तो वह एंटिटी कार्यक्षेत्र मंच पर अपना उत्पाद नहीं बेच सकती।

इसका वास्तविक अर्थ यह है कि, इन नए नियमों के अनुसार, यदि ऐमज़ॉन, मोर का अधिग्रहण कर लेता है तो वह उसकी इन्वेंट्री को नियंत्रित नहीं कर सकता, उसकी रोज़मर्रा की गतिविधियों का हिस्सा नहीं बन सकता व मोर के स्टोर में बिकने वाले उत्पादों को अपने मंच पर ऑनलाइन नहीं बेच सकता। दूसरे शब्दों में, मोर Amazon.in मार्किटप्लेस का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।

यह इस समझौते की राह में रोड़े अटका सकती है क्योंकि ऐमज़ॉन की वास्तविक योजना मोर को ऐमज़ॉन प्राइम नाउ मार्किटप्लेस पर विक्रेता के रुप में शामिल करने की थी और अब इसके अनुसार दोनों कंपनियों के बीच दोनों ओर से सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता।

ऐमज़ॉन के लिए इस सौदे को आगे ले जाने का एक ही रास्ता है और वह है कि ऐमज़ॉन इस अधिग्रहित कंपनी में केवल एक विक्तिय निवेशक के रुप में काम करे। ऐमज़ॉन ने अभी तक बोर्ड व प्रबंधन से दूरी बनाए रखते हुए न्यूनतम शेयर ही लिए हैं।

ऐमज़ॉन के लिए दूसरा विकल्प है कि वह एकीकरण की अपनी योजना को तब तक रोक ले जब तक नीतियों में ने बदलाव नहीं आ जाते। ऐसा होने की स्थिति में ऐमज़ॉन अपनी आरंभिक योजना के अनुसार कार्य कर सकता है। यह देखना होगा कि ऐमज़ॉन इनमें से कौन सा विकल्प चुन कर आगे बढ़ता है।

इस ख़बर से जुड़े तथ्यों का स्त्रोत ET है।

Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here