भुगतान बैंकों के विक्तिय मैट्रिक्स ने किया घाटे की ओर रुख; नुकसान बढ़ना ज़ारी

भारतीय सरकार के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक भी वर्ष 2014 से डिजिटल इंडिया आंदोलन को आगे बढ़ा रहा है। भुगतान बैंक भी इस वित्तीय समावेशन आंदोलन का एक अभिन्न अंग थे।

हालाँकि, अब लगातार पिछले दो वर्षों से, इस पहल से सरकार और बैंकों का शुद्ध और परिचालन घाटा, दोनों बढ़ता जा रहा है।

नवीनतम रिपोर्ट में, भुगतान बैंक मंचों के समेकित वित्तीय विवरणों से पता चला कि वित्तीय वर्ष 2017 में उनका शुद्ध घाटा 242.2 करोड़ रुपये से 2.1 गुना बढ़कर 516.15 करोड़ रुपये हो गया है।

भुगतान बैंक, ऑपरेटिंग मेट्रिक्स में लाभप्रदता हासिल करने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उनके घाटे ने वित्तीय वर्ष 2018 में 240.7 करोड़ रुपये से 522.1 करोड़ रुपये तक की ऊंची छलांग लगाई है (2.2 गुना)। दिलचस्प बात यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उनका ऑपरेटिंग लॉस, नेट लॉस की तुलना में कम था, लेकिन इस साल मेट्रिक्स उलट हो गए हैं, जिससे यह मामला ज्यादा चिंताजनक हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन वित्तीय रिपोर्टों में घाटे का प्रमुख कारण आधारभूत संरचनाओं को विकसित करने में भुगतान बैंकों द्वारा किया गया खर्चा है, जिसमे भारी निवेश लगता है। इस निवेश से सेवाओं का लाभ उठाने में पिछड़ी जनसांख्यिकी सक्षम होती है।

उन्नत तकनीक के साथ कार्यशील नियमित बैंक भी कोई सकारात्मक संकेत नहीं दे रहे हैं।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी, पहली छमाही में नकारात्मक लाभ के कॉलम दिखाए गए थे, और इकॉनॉमिक टाइम्स को दिए गए आरबीआई के बयान के अनुसार, यह प्रवृत्ति आगामी कई तिमाहियों तक जारी रहेगी।

दूसरी ओर, स्थिति हर तरफ से नकारात्मक नहीं है क्योंकि कई छोटे मैट्रिक्स ने सकारात्मक वृद्धि दिखाई है। इनमें इन बैंकों के शेयर जमा शामिल हैं जिनमे पिछले वित्तीय वर्ष में 5.7 प्रतिशत से 9 प्रतिशत तक की मामूली वृद्धि दर्ज की गई थी। शुद्ध ब्याज आय भी 30.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 151.1 करोड़ रुपये हो गई थी।

वित्तीय वर्ष 2018 में बैलेंस शीट कॉलम की कुल राशि भी 1,139.9 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,891.6 करोड़ रुपये हो गई थी।

इनमें से लगभग 81 प्रतिशत लेनदेन, मोबाइल आधारित डिजिटल माध्यमों जैसे मोबाइल और ई-वॉलेट के माध्यम से हुए हैं।

ऐसी 11 इकाइयां हैं जिन्हें अब तक बाज़ार में भुगतान बैंक के रूप में कार्य करने के लिए RBI की स्वीकृति प्राप्त है। इनमें आदित्य बिड़ला पेमेंट्स बैंक (Aditya Birla Payments Bank), एयरटेल पेमेंट्स बैंक (Airtel Payments Bank), इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (India Post Payments Bank), फिनो पेमेंट्स बैंक (Fino Payments Bank), जियो पेमेंट्स बैंक (Jio Payments Bank) और पेटीएम पेमेंट्स बैंक (Paytm Payments Bank) शामिल हैं।

यह जानकारी मूल रूप से भारतीय रिजर्व बैंक की ट्रेंड्स एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया: 2017-2018, रिपोर्ट से ली गयी है।

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