Ola की निगाह अब दवाई वितरण सेवा पर, Myra Medicines का हो सकता है अधिग्रहण

पिछले महीने वोगो (Vogo) में $100 मिलियन के निवेश के माध्यम से स्कूटर किराये के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद, कैब-सेवा प्रमुख ओला (Ola), अब दवा वितरण क्षेत्र के लिए तैयार है।

भाविश अग्रवाल के नेतृत्व वाली फर्म, माइरा मेडिसिन (Myra Medicine) के साथ संभावित अधिग्रहण के लिए बातचीत कर रही है। यह कैब-सेवा फर्म, हर प्रकार की डिलीवरी करने की इच्छा रखती है।

इस विकास से जुड़े सूत्रों ने मिंट से कहा, चूंकि दवा वितरण क्षेत्र में बहुत अधिक संभावनाएं हैं, इसलिए ओला इस क्षेत्र में एक शुरुआती प्रस्तावक होने का लाभ उठाना चाहता है। इसके साथ ही, यह अधिग्रहण मायरा को इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बने रहने में भी मदद करेगा, सूत्रों ने आगे कहा। यह सौदा कथित तौर पर आम निवेशक मैट्रिक्स पार्टनर्स द्वारा संचालित है और अगले कुछ हफ्तों में इसके पूरा होने की उम्मीद है।

चार वर्ष पूर्व शुरू हुआ मायरा, दवाओं, शिशु देखभाल, दंत चिकित्सा और स्वच्छता उत्पादों सहित अन्य श्रेणियों में एक इन्वेंट्री के नेतृत्व वाले मॉडल का व्यवसाय करता है।

यह स्टार्टअप, एक घंटे के भीतर दवा वितरित करने का दावा करता है। इसे मैट्रिक्स (Matrix), टाइम्स इंटरनेट (Times Internet) और ड्रीम इनक्यूबेशन (Dream Incubation) जैसे निवेशकों का समर्थन मिला है।
ओला, दवाओं के वितरण के लिए अपने मौजूदा खाद्य-वितरण खेमे का उपयोग करेगा।

हाल के दौर में, कैब-सेवा फर्म अपने वितरण व्यवसाय का आक्रामक रूप से विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है। फूड-वितरण और भुगतान व्यवसाय में कदम रखने के बाद, पिछले महीने इसने स्कूटर-शेयरिंग मंच Vogo में निवेश के माध्यम से स्कूटर रेंटल क्षेत्र में प्रवेश किया।

ऑनलाइन दवा वितरण खंड में फार्मइजी (PharmEasy), वनएमजी (1mg), नेटमेड्स (Netmeds) और लाइफकेअर (LifCare) सहित खिलाड़ी हैं। हाल ही में, फार्मइजी, नेटमेड्स, और लाइफकेअर ने निवेश जुटाया है। ये सभी कंपनियां, इस क्षेत्र में अधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए तेज़ी से खर्च कर रही हैं।

उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में बने रहने के लिए ब्रांड मार्केटिंग और छूट पर भारी खर्च करने के लिए एक बड़ी पूंजी की आवश्यकता होती है।

इस क्षेत्र की क्षमता ने ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी दिग्गजों को भी आकर्षित किया है, जिसमें ऐमजॉन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart), स्विगी (Swiggy) और बिगबास्केट (BigBasket) के नाम शामिल हैं। ये सभी कथित तौर पर दवा वितरण क्षेत्र में प्रवेश करने की योजना बना रहे हैं।

इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के अनुसार, ई-फार्मेसी का बाजार वर्ष 2020 तक $55 बिलियन के आंकड़े तक पहुंच सकता है। वर्तमान में, रिपोर्टों के अनुसार, ऑनलाइन फ़ार्मेसी का कुल दवा बिक्री में केवल 1 प्रतिशत का योगदान है।

इस बीच, पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय ने ई-फार्मेसियों और दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर देशव्यापी प्रतिबंध लगा दिया था। मंगलवार को कोर्ट ने फिर जोर दिया कि यह प्रतिबंध, अदालत की सुनवाई की अगली तारीख, 6 फरवरी तक जारी रहेगा।

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