शेयर बाज़ार क्रैश, ऑडिटर के सवाल, CC Avenue का विलय: क्या Infibeam का भविष्य है खतरे में

भारतीय ई कॉमर्स कंपनियां हमेशा से, इकाई अर्थशास्त्र की परवाह किए बिना स्वच्छंद रुप से पूंजी लुटाती रही हैं। कुछ ही कंपनियां ऐसी हैं जो इंटरनेट से अलग भी आय अर्जित करना जानते हैं। इंफीबीम ऐसे ही एक अपवाद के रुप में सामने आई जब उसने विक्तिय वर्ष 2017 के शुरु में स्टॉक एक्सचेंज में अपना पहला कदम रखा।

इसने विश्लेषकों व समीक्षकों को भी अपनी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग ( IPO) व इसके परिणाम के प्रदर्शन से चौंका दिया था। लिस्टिंग के समय 337 करोड़ रुपए के राजस्व और 8.8 करोड़ के लाभ से बढ़ कर इंफीबीम ने विक्तिय वर्ष 18 में 88 करोड़ के लाभ के साथ 839 करोड़ रुपए का राजस्व दर्ज़ किया।

दुर्भाग्य से कंपनी का यह उच्च प्रदर्शन उस समय से खतरे में आ गया जब से उस व्हाट्सएप संदेश का प्रचार किया जिसमें कंपनी पर कॉर्पोरेट शासन के अभाव का आरोप लगाया गया था। इस एक संदेश ने केवल एक दिन में 9,200 करोड़ रुपए की मार्किट कैप को ख़त्म कर दिया था।

जनवरी 2009 में सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज़ के बाद अब तक की यह सबसे बड़ी स्टॉक गिरावट थी।

इतना ही नहीं, इंफीबीम में आई यह दरार समय के साथ बढ़ती नज़र आ रही है। स्नैपडील से यूनिकॉमर्स के संभावित अधिग्रहण की असफलता के एक सप्ताह के भीतर ही, उनके ऑडिटर ने भुगतान मंच – Avenues India Private Limited ( जिसे पहले CC Avenue के नाम से जाना जाता था) के साथ हुए कंपनी के विलय पर जांच करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट की मांग की है।

SRBC & CO LLP, जो EY इंडिया की ऑडिट इकाई है, ने प्रबंधन से दो मामलों में एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। वह हैं- विलय व अधिग्रहण और विक्तिय वर्ष 2019 की पहली तिमाही में हुए अन्य विक्तिय विवरणों संबंधी मामले।

ऐसे कुछ खुलासे स्टॉक एक्सचेंज के सामने जून 2018 में ख़त्म हुई तिमाही की आय घोषित करते समय की गई थी। जहां एक ओर कंपनी का कहना है कि Avenues लिमिटेड के साथ हुए उसके विलय की जांच एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट ने की थी व उसने किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत नहीं की थी, वहीं ब्लूमबर्ग क्विंट की रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिटर कंपनी के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है।

SRBC & Co ने इंफीबीम से उक्त स्वतंत्र जांच की विस्तृत रिपोर्ट जमा कराने के लिए कहा है। इसमें यह भी उल्लेखित किया गया है कि इंफीबीम की FY18 रिपोर्ट और पहली तिमाही की आय पर विलय के असर का तब तक पता नहीं चल सकता जब तक जांच ख़त्म नहीं हो जाती।

एवेन्यूज़ प्राइवेट लिमिटेड के इंफीबीम के साथ विलय 2,000 करोड़ में हुआ था पर एवेन्यूज़ प्राइवेट लिमिटेड की फेयर वैल्यू केवल 134 करोड़ रुपये में हुई। बाकी बचे 1,846 करोड़ के स्टॉक, अदृश्य संपत्ति के लिए दिए गए जिनमें सॉफ्टवेयर, ट्रेडमार्क, गुडविल व ग्राहकों के साथ संबंध शामिल थे।

कुल अधिग्रहण की 93 प्रतिशत राशि अदृश्य संपत्ति के लिए थी। अधिग्रहण के दौरान ऐसी संपत्ति का इतनी मात्रा में होना संभवतः ऑडिटर के लिए चिंता का विषय है। एन्ट्रैकर ने ऑडिटर द्वारा भेजे गए प्रश्नों की वजह जानने के लिए इंफीबीम के प्रवक्ता तक पहुंचने का प्रयास किया है।

हालांकि अभी तक कंपनी की ओर से हमारे विस्तृत प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं आया है।

कॉरपोरेट शासन से जुड़े एक के बाद एक विवाद और साथ में कोठारी से संबंधित हलचल व यूनिकॉमर्स सौदे से आपसी निकास, यह सभी पहली पब्लिक ई कॉमर्स कंपनी के अनिश्चित भविष्य की ओर इशारा कर रहें हैं।

जहाँ कई प्रश्नों के उत्तर शायद तभी मिल पाएंगे जब इंफीबीम अपने 2019 की तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा करेगा, वहीं इन सब विवादों व मुश्किलों से बाहर निकलना, कंपनी के लिए एक कड़ी चुनौती होगी।

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