चीन के Zhihu की सफलता का अनुसरण करना चाहता है Vokal: क्या भारत में यह एक प्रश्नोत्तर मंच के रुप में हो पाएगा विकसित?

400 मिलियन स्मार्टफोन और सस्ते 4 जी डेटा के प्रवेश के साथ, टियर III, IV और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय, पहली बार इंटरनेट का अनुभव कर रहे हैं। यह उपयोगकर्ता, 1.3 बिलियन नागरिकों वाले वाले देश की दो तिहाई आबादी का निर्माण करते हैं (750 मिलियन से अधिक)। उन्हें ऐसे मंच चाहिए, जहाँ वे अपनी भाषाओं में कंटेंट का उपभोग, निर्माण और अभिव्यक्ति कर सकें।

इस मांग ने कई स्थानीय और चीनी वर्नाक्यूलर कंटेंट एप्स, मुख्य रूप से शेयरचैट (ShareChat), टिक टॉक (TikTok), डेलीहंट (Dailyhunt), क्वाइ (Kwai), बीगो लाइव (Bigo Live), न्यूज़ डॉग (NewsDog) और हेलो (Helo) के विकास को गति दी है।

ये एप कभी न खत्म होने वाले मनोरंजन की आपूर्ति के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं की भाषाओं में स्थानीय समाचारों और सूचनाओं को क्यूरेट करते हैं (उन्ही उपयोगकर्ताओं की भागीदारी के साथ) – अर्थात; हिंदी, तेलुगु, मराठी, गुजराती भाषाओं में। उद्यमियों के अलावा, वीसी और रणनीतिक निवेशक भी स्थानीय कंटेंट और सोशल स्पेस की क्षमता के बारे में आश्वस्त हैं।

कंटेंट व्यवसाय के लिए ऐसी संभावनाएं चीन से आई है, जहां टॉटीआओ (टिकटोक की मूल इकाई, दुनिया की सबसे अधिक मूल्य वाली निजी कंपनी) और कुइशौ (या क्वाई) सहित कई कंपनियां बड़ी इकाइयां बन गई हैं।

चीन का मानना ​​है कि भारत भी दो-तीन बड़ी कंपनियों को कंटेंट और सोशल मीडिया क्षेत्र में निर्मित करेगा। इस विश्वास पर भरोसा करते हुए, अप्रमेय राधाकृष्ण और मयंक बिदावतका, जोकि वोकल के संस्थापक हैं, ने आवाज आधारित ज्ञान साझा करने वाले मंच वोकल (Vokal) की अवधारणा हमारे सामने रखी।

यह एक उपयोगकर्ता-जनित कंटेंट (UGC) मंच है, जो उपयोगकर्ताओं को आवाज़ या टेक्स्ट के माध्यम से सवाल पूछने और जवाब देने की अनुमति देता है। इस मंच का उद्देश्य भारत में एक गैर-अंग्रेजी भाषी आबादी तक पहुंचना है और वो करना है जो Zhihu (झीहू) ने, एक बहुत ही सफल कोरा (Quora) -जैसा Q & A मंच, चीन में किया है।

केपीएमजी (KPMG) और गूगल (Google) की एक रिपोर्ट में भी छोटे शहरों और ग्रामीण भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या के चलते, कंटेंट क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को उजागर किया गया है। संयुक्त रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में 250 मिलियन वर्नाक्यूलर इंटरनेट उपयोगकर्ता मौजूद हैं। अगले दो वर्षों में इस संख्या के लगभग 600 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।

यह संख्या अब बढ़ने ही वाली है क्योंकि स्मार्टफोन सस्ते हो रहे हैं और डेटा को कमोडिटाइज़ किया जा रहा है।

कोरा द्वारा वर्नाकुलर दर्शक आधार प्राप्त करने के प्रयास के बावजूद, यह अब तक उन्हें आकर्षित करने में विफल रहा है। और, इसका कारण बताना आसान है। कोरा, स्वाभाविक रूप से अंग्रेजी बोलने वालों के लिए ही बनाया गया है।

ज्ञान साझा करने के लिए अमेरिका के बाद भारत एक प्रमुख बाजार के रूप में उभरा लेकिन यह 100 मिलियन से अधिक के पैमाने को छूता हुआ नहीं दिख रहा है। कम से कम पिछले रुझान तो यही दिखाते हैं।

कोरा ने भारत को नई संभावनाएं जरूर दिखाई हैं, लेकिन भारत को झीहू की आवश्यकता है। “भारतीय भाषाओं में कार्यशील एक उच्च-गुणवत्ता वाले कंटेंट मंच की आवश्यकता है। वोकल, तमाम श्रेणियों में ज्ञान साझा करने के लिए एक डिफ़ॉल्ट गंतव्य होने की आकांक्षा रखता है जो कि वर्नाकुलर उपयोगकर्ताओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है,” अप्रमेय ने कहा।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान केंद्रित रखने के लिए, मंच के पास विकल्प के रूप में अंग्रेजी भाषा है ही नहीं।

वोकल, झीहू के समान है, इस बात का अनुमान लगाने का हमारा तर्क यह है कि वोकल, दृष्टिकोण और विशेषताओं में कोरा की तुलना में एक उत्पाद के रूप में झीहू की तरह अधिक लगता है।

जैसा कि चीन में झीहू ने किया था, वोकल स्वयं को उन विषयों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य में बदलने की कोशिश कर रहा है, जो विषय वर्नाकुलर दर्शकों को प्रभावित कर सकते हैं। इस तरह के विषय, प्रेम से लेकर करियर, जीवन और प्रेरणा तक हैं।

झीहू के समान, वोकल में प्रश्नों और उत्तरों की एक लंबी फीड है। इसके अलावा, दोनों एप में प्रभावशाली व्यक्ति मौजूद हैं जो ध्वनि रिकार्डेड उत्तर के साथ प्रश्नों का उत्तर देते हैं। वे कोरा उपयोगकर्ताओं की तुलना में ‘upvote’ और ‘downvote’ बटन का अधिक बार उपयोग करते हैं।

अक्टूबर 2017 में लॉन्च किया गया, वोकल हर दिन 1,000 सवाल दर्ज करने का दावा करता है। “हम 30 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रहे हैं और 1 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं (MAU) की संख्या को पार कर चुके हैं,” अप्रमेय कहते हैं।

हिंदी के साथ शुरू हुआ वोकल अब कन्नड़ और तमिल दर्शकों की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। मई में, इसने स्टुपिडचैट (StupidChat) का भी अधिग्रहण कर लिया था, जो साल भर पुरानी इस फर्म के लिए क्विज़िंग क्षेत्र में तेजी से संभावनाएं बना रहा है।

वे निवेशक जिन्होंने अप्रमेय के पिछले स्टार्टअप – टैक्सीफॉरश्योर (TaxiForSure) के साथ सफलता का स्वाद चखा है, वे वोकल की सफलता के बारे में आशावादी हैं। कलारी कैपिटल (kalaari Capital) और 500 स्टार्टअप (500 Startups) के अलावा ब्लूम वेंचर्स (Blume Ventures) और एक्सेल पार्टनर्स (Accel Partners) ने बेंगलुरु स्थित इस कंपनी में $6 मिलियन से अधिक का निवेश किया है।

ज्ञान साझाकरण क्षेत्र में वोकल के भविष्य के बारे में अप्रमेय आश्वस्त दिखते हैं। “हम अगले 18 महीनों में 100 मिलियन एमएयू मार्क हासिल करना चाहते हैं।”

हालाँकि अप्रमेय, इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं कि उन्हें कोरा या झीहू से किसी भी प्रकार की कोई प्रेरणा मिली है, लेकिन झीहू की सफलता से वोकल अधिक प्रेरित दिखता है।

पैमाने के मामले में न केवल झीहू, कोरा के साथ बराबरी पर है, बल्कि यह अपने अमेरिकी प्रतिद्वंदी की तुलना में अधिक मूल्यांकन का दावा करता है। पिछले वित्तीय दौर के दौरान जहां कोरा का मूल्यांकन $1.8 बिलियन था वहीं झीहू का मूल्यांकन $2.5 बिलियन डॉलर तक बढ़ गया था।

इस साल अगस्त तक, झीहू ने अपने मंच पर 200 मिलियन से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता होने का दावा किया। कोरा का वैश्विक उपयोगकर्ता आधार भी 200 मिलियन है।

क्या वोकल भारत में इस तरह के पैमाने को दोहरा सकता है? क्या उपयोगकर्ता कंटेंट के लिए भुगतान करेंगे जैसे कि झीहू उपयोगकर्ता करते हैं, विशेष रूप से भारत में जहां अधिकांश इंटरनेट उपयोगकर्ता निम्न आय वर्ग के हैं?

अप्रमेय आशावादी हैं

“ऐसे मामले देखे गए हैं जहां लोगों ने उपयुक्त एवं बेहतर कंटेंट के लिए भुगतान करने की इच्छा दिखाई है, मुख्य रूप से शिक्षा और कैरियर परामर्श ज्ञान क्षेत्र में,” अप्रमेय अंत में कहते हैं।

क्या वोकल समस्त बाधाओं को पार करते हुए वैसी ही सफलता की कहानियां लिखने में सक्षम होगा जैसी चीन में झीहू ने लिखी है?

इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। वोकल एक कहानी है, जो अभी बस शुरू हुई है। और आने वाले वर्षों में इसका प्रदर्शन ही हमें बताएगा कि यह कितना आगे जाएगा।

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