साईकल साझा स्टार्टअप, Mobycy, ई – बाइक साझा मंच बनने की ओर करेगा रुख

मोबीसी (Mobycy), जो अंतिम मील कनेक्टिविटी की समस्या हल करने के उद्देश्य से निर्मित एक डॉकलेस साइकिल शेयरिंग एप है, अब ई-बाइक और ई-स्कूटर शेयरिंग मंच बनने के लिए तैयार है।

मोबाईकी के सह-संस्थापक, आकाश गुप्ता के अनुसार, फर्म ने गुरुग्राम के कई हिस्सों में अपने इन-हाउस डिज़ाइन किए गए इलेक्ट्रिक स्कूटर का पायलट परिक्षण किया है। अब तक, उनके लगभग 100 ई-स्कूटर परिचालन में हैं और यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य हिस्सों में अपनी सेवा का विस्तार करने की योजना बना रहा है।

इसके अलावा, एक साल पुराने इस स्टार्टअप का इरादा इस महीने तक NCR में 300 Zypp स्कूटर और अगले छह महीनों में 5,000 से अधिक ई-स्कूटर लॉन्च करने का है। यह स्टार्टअप हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे में, जहां नागरिकों और सरकारी एजेंसियों द्वारा बाइक शेयरिंग मॉडल का स्वागत किया गया है, अपने परिचालन का विस्तार करना चाह रहा है।

हैदराबाद में, मोबीसी अंतिम मील कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए मेट्रो प्रबंधन के साथ बातचीत कर रहा है।

साइकिल की तरह, मोबीसी के ई-स्कूटर को क्यूआर-कोड सक्षम किया जाएगा, जो शेष बैटरी और स्कूटर रनटाइम पर अपडेट जैसी सुविधाओं के साथ सक्षम होगा।

साइकिल शेयरिंग मॉडल: भारत में एक मुश्किल व्यवसाय?

अब तक साइकल या बाइक शेयरिंग क्षेत्र में ओफो (Ofo) और मोबाइक (Mobike) जैसे वैश्विक खिलाड़ियों का दबदबा रहा है। चीन मूल की इस जोड़ी ने एक आशाजनक भविष्य की उम्मीद के साथ भारतीय बाजार में प्रवेश किया था। हालाँकि, बाद में ओफो को अपने भारतीय परिचालन को बंद करना पड़ा और इसने अपनी परिसंपत्तियों को सिकोआ-समर्थित बाउंस (Bounce) को बेच दिया।

दूसरी ओर, मोबाइक के विस्तार की योजना भी कम मांग और बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से प्रभावित हुई है।

वैश्विक प्रमुखों के अलावा, जूमकार (Zoomcar) के स्वामित्व वाली बाइक शेयरिंग एप PEDL ने भी भारत में अपने संचालन को अस्थायी रूप से रोक दिया था, जबकि ओला पेडल (Ola Pedal), युलु (Yulu) और लेट्ज़साइकिल (Letzcycle) जैसे अन्य खिलाड़ियों ने कुछ शहरों के कुछ इलाकों से परे अपनी सेवाओं को नहीं बढ़ाया है।

यहां तक ​​कि साइकिल शेयरिंग मॉडल को लेकर चीन में भी उत्साह कम हो गया है। सार्वजनिक स्थानों पर बाइक के बेड़े के प्रबंधन को लेकर ओफो और मोबाइक को कई चुनौतियों और सरकार की आपत्ति का सामना करना पड़ रहा है।

खराब सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और जागरूकता की कमी के कारण साइकिल शेयरिंग मॉडल में प्रगति करना भारत में मुश्किल है। कुछ शहरों (जैसे पुणे और अहमदाबाद) के अलावा, नागरिक साइकिल पर यात्राएं नहीं कर सकते हैं।

आगे बढ़ते हुए, या तो सरकार को इस क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल बुनियादी ढाँचे को तैयार करना चाहिए या ऐसे स्टार्टअप्स को तब तक इंतज़ार करना होगा जब तक उन्हें अपने व्यवसाय के लिए पर्याप्त सुविधाएँ न मिलें।

यह विकास इकॉनोमिक टाइम्स द्वारा रिपोर्ट किया गया।

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