उन कंपनियों के उत्पाद नहीं बेच पाएंगे, फ्लिप्कार्ट व ऐमज़ॉन, जिनमें उनकी हिस्सेदारी है: सरकार

ई कॉमर्स मार्किटप्लेस जैसे फ्लिप्कार्ट व ऐमज़ॉन जैसी बड़ी ई कॉमर्स कंपनियों को लेकर सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने इन दोनों कंपनियों को उन कंपनियों के उत्पाद बेचने से बाधित कर दिया है जिनमें इनकी हिस्सेदारी है।

‘ऐसी कोई भी इकाई जिनके ऊपर ई कॉमर्स कंपनी या उसके समूह की किसी कंपनी का नियंत्रण हो अथवा उनके भंडार में ई कॉमर्स कंपनी या उसके समूह की किसी कंपनी की हिस्सेदारी हो तो वह इकाई संबंधित ऑनलाइन मार्किटप्लेस ( मंच) के ज़रिए अपने उत्पादों की बिक्री नहीं कर सकेगी, वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने ऑनलाइन खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( FDI) के बारे में संशोधित नीति में कहा।

सरकार ने ई कॉमर्स कंपनियों को किसी ख़ास उत्पादन की अपने मंच पर एक्सक्लूसिव बिक्री के लिए अनुबंध करने पर भी रोक लगा दी है। फिलहाल सरकार ने ई कॉमर्स मंचों का संचालन करने वाली कंपनियों में शत प्रतिशत विदेशी हिस्सेदारी की छूट दे रखी है पर नियम के अनुसार वे स्वयं अपने स्टॉक की बिक्री अपने मंच पर नहीं कर सकते।

मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मार्किटप्लेस की समूह कंपनियों द्वारा खरीददारों को दिया जाने वाला कैश बैक भी उचित होना चाहिए। यह बदलाव अगले वर्ष 1 फरवरी से प्रभावी होंगे।

अधिसूचना में यह भी कहा गया कि इन कंपनियों को हर साल 30 सितंबर तक पिछले विक्त वर्ष के लिए दिशानिर्देशों के अनुपालन की पुष्टि को लेकर विधिवत नियुक्त अपने लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के साथ एक प्रमाण पत्र रिज़र्व बैंक के पास जमा कराना होगा।

मंत्रालय ने यह निर्णय घरेलू कारोबारियों द्वारा उठाई जा रही आपत्तियों के बाद लिए हैं जिनमें उन्होंने ई कॉमर्स कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को दी जा रही भारी छूट जैसे मामलों को उठाया था। इसी महीने, पीएमओ को लिखे गए एक पत्र में AIOVA ने यह शिकायत की थी कि ई कॉमर्स समूह जैसे ऐमज़ॉन और वॉलमार्ट छोटे विक्रेताओं का शोषण कर भारत के खुदरा बाज़ार को नियंत्रित कर रहें हैं।

इस संशोधित नीति पर संभावित प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो चुका है।

स्नैपडील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुणाल बहल ने सरकार द्वारा संशोधित इस नीति का स्वागत करते हुए ट्वीट किया, मार्किटप्लेस ईमानदार व स्वतंत्र विक्रेताओं के लिए है, इनमें से ज़्यादातर एमएसएमई ( MSME) हैं। यह बदलाव सभी विक्रेताओं को बराबर अवसर देंगें तथा वह ई कॉमर्स की पहुंच का फायदा उठा सकेंगे।

ऐमज़ॉन के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी अभी नीति का विश्लेषण कर रही है। देखना होगा कि इससे प्रभावित अन्य कंपनियां क्या प्रतिक्रिया देती हैं।

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