संशोधित ई कॉमर्स FDI नीति से प्रभावित होंगे नए इलेक्ट्रॉनिक व स्मार्टफोन ब्रांड

ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस को असुविधा होने के अलावा, नई ई-कॉमर्स एफडीआई नीति, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन ब्रांडों के लिए एक चुनौती साबित हो रही है।

नई नीति, ई-कॉमर्स मार्ग (जहां ऑपरेशन की लागत आम तौर पर कम है) के माध्यम से भारत में प्रवेश करने वाले कई नए ब्रांडों को प्रभावित करने के लिए तैयार है। कम परिचालन लागत के चलते, ई-कॉमर्स खिलाड़ियों के प्रीडेटरी मूल्य निर्धारण से छोटे खुदरा विक्रेताओं को नुकसान होने की घटनाएं सामने आई थी। लेकिन, 1 फरवरी, 2019 से चीजें पहले जैसी नहीं होंगी।

अब, वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस किसी भी विक्रेता को केवल अपने मंच पर किसी भी उत्पाद को बेचने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, नीति में कहा गया है कि एक मंच पर एक एकल विक्रेता, उक्त मार्केटप्लेस के कुल लेनदेन मूल्य के 25 प्रतिशत से अधिक मूल्य की बिक्री नहीं सकता है। ऐसे मामलों में जहाँ एकल विक्रेता 25 प्रतिशत से अधिक की बिक्री कर रहा है, तो उसे एक इन्वेंटरी को बनाए रखने के रूप में माना जाएगा, जो बी2सी उपभोक्ता बाजार के एफडीआई कानूनों के खिलाफ है।

तमाम चिंताओं के बीच, इसने इलेक्ट्रॉनिक एवं स्मार्टफोन ब्रांडों की एक्सक्लूसिविटी (जहां ब्रांड किसी एक मंच पर ही अपने उत्पाद की बिक्री करते हैं) की रणनीति को भविष्य में जारी रखने पर संदेह पैदा किया है। उनके द्वारा मार्केटप्लेस से नीति पर अधिक स्पष्टीकरण मांगा गया है।

पहले से ही परिचालित ब्रांड, जैसे कि बीपीएल (BPL), Blaupunkt TV, सैनयो (Sanyo), टेनोर (Tenor), थॉमसन (Thompson), ऐमजॉन बेसिक्स (Amazon Basics) और मीज़ू (Meizu), जो ऐमजॉन और फ़्लिपकार्ट (Flipkart) के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री करते हैं, अपने व्यवसाय मॉडल में परिवर्तन करने से पीछे नहीं हटेंगे।

फ्लिपकार्ट पर बिकने वाले टीवी ब्रांडों में से एक, सुपर प्लास्ट्रोनिक्स (Super Plastronics) का मानना ​​है कि यह नीति उनके व्यवसाय में बाधा नहीं बनेगी क्योंकि ब्रांडों में मार्केटप्लेस की कोई हिस्सेदारी नहीं है। यह अन्य विक्रेताओं को बेचना जारी रख सकता है। कुछ अन्य ब्रांड, ऑफ़लाइन खुदरा विक्रेताओं के साथ टकराव से बचने के लिए ऑनलाइन विशिष्टता (या एक्सक्लूसिविटी) को जारी रखने के इच्छुक हैं।

हाल के दिनों में, शाओमी (Xiaomi) और वनप्लस (OnePlus) जैसे स्मार्टफोन ब्रांडों ने, क्रमशः फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन के लिए विशिष्ट उत्पाद होकर भारतीय बाजार में बेहतर हिस्सेदारी हासिल की है। बाद में वे ऑफ़लाइन बिक्री चैनल पर चले जाते हैं।

एक नई नीति के साथ, इन ब्रांडों को अपनी व्यावसायिक रणनीति पर ध्यान देना होगा। सरकार इस बार नियमों के साथ अधिक स्पष्ट है, क्योंकि ई-कॉमर्स उद्योग में प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार पर अंकुश लगाने और सभी हितधारकों के लिए एक स्तर बनाने की आवश्यकता को इसबार सरकार ने प्राथमिकता दी है और इसकी जरूरत को समझा है।

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