एंजेल टैक्स को लेकर मिली शिकायतों के बाद सरकार आई हरकत में, कहा वास्तविक निवेश को मिलेगी सुरक्षा

Angel Tax

कई स्टार्टअप द्वारा ‘एंजेल टैक्स’ नोटिस प्राप्त होने की शिकायत करने के बाद, सरकार अंततः इस शिकायत पर कार्रवाई करने जा रही है। सरकार का कहना है कि स्टार्टअप में प्रामाणिक एवं वास्तविक निवेश पर, उचित बाजार मूल्यांकन से अधिक होने पर भी, कर (टैक्स) नहीं लगाया जायेगा।

औद्योगिक नीति और पदोन्नति विभाग (डीआईपीपी) ने कहा है कि उसने राजस्व विभाग के सामने एंजेल टैक्स नोटिस का मुद्दा उठाया है। अब यह सुनिश्चित करेगा कि एंजेल निवेशकों या स्टार्टअप को किसी प्रकार की मुश्किलों का सामना न करना पड़े।

आगे यह भी कहा गया है कि डीआईपीपी ने वर्ष 2018 से एक ऐसी प्रणाली का निर्माण किया है जिसके अंतर्गत, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में वास्तविक निवेशकों को आयकर अधिनियम की धारा 56 (2) (viib) के प्रावधानों से छूट दी जाएगी।

यह अधिनियम, अनलिस्टेड शेयर की उनके उचित कर-योग्य मूल्य से अधिक की बिक्री से प्राप्त शेयर प्रीमियम को अन्य स्रोतों से आय के रूप में देखता है। इस कदम के जरिये, गैर-सूचीबद्ध फर्मों में शेयरों के लिए प्रीमियम की आड़ में रिश्वत लेने जैसी गैरकानूनी गतिविधियों को रोका जा सकेगा।

हालांकि, सरकार ने इस प्रावधान से स्टार्टअप को छूट दी है। और डीआईपीपी ने कहा है कि वह स्टार्टअप में प्रामाणिक एवं वास्तविक निवेश की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इससे पहले, एंजेल टैक्स का मुद्दा उन उद्यमियों और स्टार्टअप द्वारा उठाया गया था जिन्हे एंजेल टैक्स नोटिस प्राप्त हुए थे। 60 से अधिक स्टार्टअप के एक समूह ने एंजेल टैक्स के मुद्दे पर सरकार से शिकायत की थी। इस शिकायत को भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की मजबूत आवाज़ों, जैसे मोहनदास पाई और कुणाल बहल द्वारा समर्थन मिला था।

एनट्रैकर इस मुद्दे को रिपोर्ट करने वाला पहला मंच था और इस कठोर टैक्स पर सरकारी हस्तक्षेप की मांग भी की थी। वाणिज्य मंत्री, सुरेश प्रभु ने इस मुद्दे को स्वीकार किया था और इसे हल करने के लिए वित्त मंत्रालय को निर्देशित किया था।

पिछले कुछ महीनों में तमाम स्टार्टअप को उच्च मूल्यांकन पर अतिरिक्त कर या प्रीमियम का भुगतान करने के लिए नोटिस प्राप्त हो रहे हैं। नवंबर में, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने 2000 से अधिक ऐसे स्टार्टअप को नोटिस जारी किए थे जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में निवेश जुटाया था।

मंत्रालय ने निवेशकों के प्रीमियम और मूल्यांकन पर सवाल उठाया जिस पर उन्होंने निवेश जुटाया। मंत्रालय इस बात की भी मांग कर रहा है कि क्या इन स्टार्टअप ने किसी भी सरकारी योजना के तहत छूट मांगी है।

स्टार्टअप को ‘उचित मूल्य’ मूल्यांकन के ऊपर की राशि पर टैक्स चुकाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसका मूल्यांकन मुख्य रूप से रियायती नकद प्रवाह (discounted cash flows) के आधार पर किया जाता है।

वर्तमान में, विदेशी निवेशकों द्वारा स्टार्टअप में किए गए निवेश पर लगभग 30 प्रतिशत एंजेल टैक्स लगाया जाता है।

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