क्यू आर कोड के माध्यम से आधार प्रमाणीकरण जल्द ही फिर होगा शुरु

बैंकों और दूरसंचार कंपनियों के लिए एक राहत की खबर आयी है,। क्यूआर कोड के माध्यम से ग्राहकों का आधार प्रमाणीकरण अब जल्द ही फिर से शुरू हो जाएगा।

इस बार इसे ऑफ़लाइन मोड में अनुमति दी जाएगी। यूआईडीएआई (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अजय भूषण पांडे के अनुसार प्रमाणीकरण प्रक्रिया की स्क्रूटिनी होगी।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया, ऑफ़लाइन मोड के साथ समायोजन के लिए इस प्रक्रिया की मौजूदा बुनियादी ढांचे में बदलाव की आवश्यकता होगी। हालांकि, निजी कंपनियों की आधार डेटाबेस तक पहुंच नहीं होगी।

यह कदम बैंक और दूरसंचार कंपनियों के लिए बड़ी राहत के रूप में कार्य करेगा, जिन्हें दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा बायोमेट्रिक डेटाबेस का उपयोग करके ऑनलाइन प्रमाणीकरण के माध्यम से ग्राहकों का नामांकन रोकने के लिए कहा गया था।

इस फैसले के बाद, इन फर्मों की ग्राहक अधिग्रहण लागत में उछाल आयी थी। आधार के साथ, प्रति नया ग्राहक लागत, 30-35 रुपये होने का अनुमान लगाया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद, ग्राहक अधिग्रहण लागत दस गुना बढ़ी है।

वेबसाइट से डाउनलोड हो जाने के बाद, 12 अंकों की आधार संख्या को उपयोग किए बिना, क्यूआर कोड ऑफलाइन मोड में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस साल सितंबर में, उच्चतम न्यायालय ने आधार अधिनियम की धारा 57 को असंवैधानिक करार दिया था, इसके चलते निजी फर्मों को सत्यापन उद्देश्यों के लिए आधार डेटाबेस तक पहुंच की इजाजत नहीं दी गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि आधार, संवैधानिक रूप से मान्य है लेकिन बैंकों और दूरसंचार कंपनियों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए यह अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, अदालत ने आयकर विभाग जैसे सरकारी एजेंसियों को आधार के उपयोग की अनुमति दी थी।

इस बीच, सरकार स्वैच्छिक आधार पर आधार से जुड़े मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के लिए कानूनी समर्थन प्रदान करने के लिए टेलीग्राफ एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉंडरिंग एक्ट (पीएमएलए) में संशोधन लाने की योजना बना रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में एक प्रस्ताव को पारित किया है।

सरकार ने बार-बार जोर दिया है कि आधार से जुडी गोपनीयता चिंता को बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है। सरकार का यह दावा है कि वर्ष 2017 में आधार का उपयोग करके सब्सिडी में 90 करोड़ रुपये बचाए गए हैं।

आज तक, आधार के तहत 1.22 अरब से अधिक लोगों को नामांकित किया गया है।

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