Talentedge: एक ऐसा भारतीय ऑनलाइन शिक्षा स्टार्टअप जो दे रहा है अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंदियों को टक्कर

Talentedge

साल 2012 तक बहुत ही कम लोग ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देख पा रहे थे। दिल्ली स्थित इक्विटी फर्म लूमिस पार्टनर्स (Lumis Partners) में सीनियर पार्टनर, आदित्य मलिक उन लोगों में से हैं जिन्होंने यह देखा और समझा। जब उनकी फर्म ने एक ऑनलाइन शिक्षा स्टार्ट-अप कार्रोक्स (KarRox) का अधिग्रहण किया तो उसे एक नया रूप देने और आगे बढ़ाने के लिए मलिक कंपनी के सीईओ और एमडी के रूप में चुने गए।

फर्म की कमान सँभालते ही मलिक ने डिजिटल क्लासरूम को असल क्लासरूम का रूप देने के लिए कई सारे परिवर्तन किए। सबसे पहले उन्होंने कार्रोक्स का नाम बदल कर टैलेंट एज (Talentedge) किया और उसके बाद उसे एक edtech फर्म के रूप में बदलना शुरू कर दिया। टैलेंट एज को असल क्लासरूम जैसा परिवेश देने के लिए कंपनी द्वारा तकनीक पर विशेष निवेश करके उसे वास्तविक बनाने की कोशिश की गयी। इसके साथ ही साथ कंपनी द्वारा भारत के प्रख्यात संस्थानों को राजस्व बंटवारे वाले मॉडल के साथ अपने साथ जोड़कर उनकी मदद से व्यवसाय प्रबंध, एनालिटिक्स, एचआर, साइबर सुरक्षा, वित्त जैसे तमाम अन्य कोर्सेज तैयार किये गए।

पिछले 5 सालों में, कंपनी ने कई शहरों एवं 3 लाख से ऊपर छात्र/छात्राओं को अपने साथ जोड़ा है। कंपनी का, वित्तीय वर्ष 2017-18 के अंत तक 100 करोड़ का मुनाफा कमा लेने का दावा है। लेकिन मुनाफे से ज्यादा जरुरी यह है कि मलिक के पास अब कंपनी के भविष्य को लेकर एक सपना है। वो टेलेंट एज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों ले जाना चाहते हैं।

टैलेंट एज के 3 लाख तक पहुँचने की कहानी

प्रख्यात संस्थानों की सहभागिता के साथ कंपनी द्वारा उच्च स्तरीय कोर्स तैयार हो पाए। कंपनी ने इसके बाद कॉर्पोरेट्स को भी अपने साथ जोड़ लिया। आज यह ऑनलाइन मंच 16 पार्टनर्स के साथ मजबूती से खड़ा हुआ है, जिनमे XLRI-जमशेदपुर, आईआईएम-काशीपुर, आईआईएम-रोहतक, SPJIMR, MICA, OLX, Viacom 18 एवं Wizcraft जैसे संस्थानों एवं कंपनियों के नाम शामिल हैं।

मलिक ने लोगों के लिए दो मॉडल्स तैयार किये, एक मॉडल अपनी रूचि के आधार पर सीखने वाले लोगों के लिए और दूसरा मॉडल उनके लिए जो सामूहिक या कॉर्पोरेट्स मांगों पर आधारित कोर्स सीखना चाहते हों। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया, “अपने प्रीमियम एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम के तहत हम व्यक्ति विशेष की रूचि पर आधारित डिग्री कोर्स उपलब्ध करवाते हैं और कॉर्पोरेट्स मांगों के आधार पर हम उद्योग से जुड़े हुए कोर्सेज, प्रोडक्ट मॉड्यूल्स एवं एन्ड-यूजर लर्निंग जैसे कोर्स उपलब्ध करवाते हैं”।

तकनीक है हमारा आधार

ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार करना एक अलग चीज़ होती है और सीखने वालों की उसमे रूचि बरक़रार रख पाना एक अलग चीज़ होती है। मलिक का कहना है कि उनकी कंपनी ने अपने ऑनलाइन प्लेटफार्म को असल क्लासरूम जैसा बनाने के उद्देश्य से तकनीक में अच्छा ख़ासा निवेश किया है। जिस वजह से सीखने वालों का उनके प्लेटफार्म पर लगातार बरक़रार रहना संभव हो पाया है और वो कहीं भी कभी भी इस प्लेटफार्म से अपनी पसंद के कोर्सेज सीख सकते हैं। हाल ही में प्लेटफार्म द्वारा डाटा एनालिटिक्स, फेशियल रिकग्निशन, एवं इंगेजमेंट स्कोर जैसी तकनीक को भी अपनाया गया है जिससे लोगों की सीखने की रफ़्तार बेहतर हो सके।

टैलेंट एज के बढ़ते कदम

टैलेंट एज अपने 200 कर्मचारियों के साथ गुरुग्राम, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे में कार्यरत है। यह साल दर साल 50 प्रतिशत के विकास के साथ आज 280 शहरों तक पहुँच चुका है। कंपनी का इरादा अब जल्द ही टियर 2 एवं टियर 3 शहरों में प्रवेश करने का भी है और इसके साथ ही कंपनी का इरादा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी एक अलग पहचान बनाने का भी है।

टैलेंट एज द्वारा जल्द ही अपने उत्पाद एवं सेवाओं को बांग्लादेश, श्रीलंका, पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका में भी लांच किया जायेगा। हालाँकि उसमे कुछ समस्याओं का सामना कंपनी द्वारा किया जा सकता है। एशिया में रहने वाले छात्र/छात्राएं भारतीय शिक्षक चाहते हैं तो वहीँ अफ्रीकी देशों में यूरोपियन शिक्षा प्रणाली अपनायी जाती है। अपनी विस्तार योजना के बारे में बताते हुए श्री मालिक ने कहा, “हमारा इरादा है की हम बांग्लादेश जैसे एशियाई देशों में भारतीय शिक्षकों का उपयोग करें और अफ़्रीकी देशों के लिए हम UK के शिक्षकों के साथ काम करने पर विचार कर रहे हैं”।

एशियाई देशों में भारतीय कोर्सेज की बहुत मांग है। जबकि अफ्रीका में लोगों का झुकाव पश्चिमी देशों की शिक्षा प्रणाली की ओर है।

मुनाफे के लिए करना पड़ सकता है इंतज़ार

5 साल पुरानी कंपनी, टैलेंट एज द्वारा तकनीक एवं टीम निर्माण में काफी निवेश किया गया है। 2017 में कम्पनी मुनाफे के साथ चल रही थी और अगले 18-24 महीनों में कपनी का इरादा EBITDA प्रॉफिटेबल बनने का है। हालाँकि कंपनी द्वारा शुद्ध लाभ के सम्बन्ध में कोई दावा नहीं किया गया है।

ऐसा इसलिए है क्यूंकि कंपनी द्वारा भारत और विश्व में विस्तार के लिए निवेश की काफी आवश्यकता होगी। हालाँकि मलिक यह मानते हैं कि कम्पनी के विस्तार के चलते मुनाफे पर खास असर नहीं आएगा क्यूँकि उनके पास टीम, तकनीक एवं सम्पर्क मौजूद हैं और अब उसे केवल आगे लेकर जाना है।

बाजार में संभावनाएं

Google एवं KPMG की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में अगले 5 सालों में 8 गुना वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है और यह 2021 तक $1.96 बिलियन का बाजार हो जायेगा।

टैलेंट एज अपने प्रतिद्वंदी के रूप में वर्ष 2012 में शुरू हुए कोर्स एरा(Coursera) और Udemy को देखता है। Udemy, एक वैश्विक मार्केटप्लेस है जो ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में काम करता है और उसके द्वारा अब तक $173 मिलियन जुटाए जा चुके हैं।

मलिक कहते हैं की ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र की अभी यह शुरुआत भर है, अभी तो और ऊंचाइयां छूना शेष है।

यह पूछने पर कि बहुत से ऑनलाइन शिक्षा कंपनियों के अचानक बंद हो जाने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं, मलिक का कहना था की, “ऑनलाइन शिक्षा के दो भाग होते हैं- उत्पाद और सेवाएं। स्टार्टअप्स को दोनों चीज़ों पर बराबर ध्यान देना होगा और केवल तब ही ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में आप सफल हो सकते हैं”।

Talentedge: वेबसाइट

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